काशीपुर। शहर में शिक्षा और प्रशासन के समन्वय का एक अत्यंत प्रेरणादायक और अनूठा उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल, काशीपुर ने एक अभिनव पहल करते हुए शहर को एक दिन के लिए एक नन्हा मेयर सौंपा। यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने, उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं से परिचित कराने और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करने का स्पष्ट उद्देश्य निहित था। इस कार्यक्रम ने शहर भर में चर्चा का विषय बनकर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और नागरिकों के बीच एक सकारात्मक संदेश प्रसारित किया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। विद्यालय की इस सोच और पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि बच्चों को सही मंच और अवसर दिए जाएं, तो वे न केवल सीख सकते हैं बल्कि समाज को नई दिशा भी दे सकते हैं।
इस विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 10वी की छात्रा आन्या मेहरोत्रा को एक दिन के लिए काशीपुर का मेयर बनने का अवसर प्रदान किया गया, जो अपने आप में अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण था। गोयंका की को-एमडी रिशिता सक्सेना अग्रवाल के प्रगतिशील विचार और इस प्रस्ताव को वास्तविकता में बदलने की उनकी पहल ने इस कार्यक्रम को संभव बनाया। वहीं, काशीपुर के मेयर दीपक बाली द्वारा इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकृति देना उनकी दूरदर्शिता और युवाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह पूरा अनुभव केवल आन्या के लिए ही नहीं, बल्कि विद्यालय के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया। इस पहल ने बच्चों में यह विश्वास जगाया कि यदि उन्हें अवसर मिले, तो वे भी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को समझ सकते हैं और समाज के लिए सार्थक योगदान दे सकते हैं।

दिन की शुरुआत से ही आन्या मेहरोत्रा मेयर दीपक बाली के साथ रहीं और उन्होंने उनके साथ रहकर प्रशासनिक कार्यों को नजदीक से समझने का प्रयास किया। सुबह के समय से ही उन्होंने मेयर की दिनचर्या को ध्यानपूर्वक देखा और यह जाना कि एक जनप्रतिनिधि किस प्रकार अपने कार्यों का संचालन करता है। दिनभर उन्होंने काशीपुर वासियों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान की प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि किस प्रकार महापौर दीपक बाली धैर्य, विवेक और त्वरित निर्णय क्षमता के माध्यम से जनता की समस्याओं का समाधान करते है। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत शिक्षाप्रद रहा, क्योंकि इससे उन्हें न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समझ मिली, बल्कि यह भी ज्ञात हुआ कि एक जिम्मेदार पद पर रहकर किस प्रकार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होता है।
कार्यक्रम के दौरान आन्या को ख्वाहिश एनजीओ की संचालिका आयुषी नागर द्वारा संचालित वेदशाला में भी जाने का अवसर मिला, जहां स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा आयोजित की गई थी। इस चर्चा के दौरान आन्या ने मेयर दीपक बाली के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और समझा कि शहर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए किस प्रकार की योजनाएं और प्रयास आवश्यक होते हैं। स्वच्छता के प्रति जागरूकता और उसके समाधान के तरीकों को जानना उनके लिए एक नया अनुभव था, जिसने उन्हें समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने में सहायता प्रदान की। इस दौरान उन्होंने यह भी जाना कि सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही किसी भी शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

इसके पश्चात आन्या ने महापौर दीपक बाली के साथ निर्माण एवं ध्वस्तिकरण केंद्र का भी दौरा किया, जहां उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया को समझा। उन्होंने देखा कि किस प्रकार निर्माण कार्यों से निकलने वाले अवशेषों को पुनः उपयोगी बनाया जा सकता है और किस प्रकार कूड़े की समस्या का समाधान खोजा जाता है। वहां मौजूद प्रबंधकों के साथ महापौर की बातचीत को सुनकर उन्होंने यह समझा कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सही उपयोग के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना कितना आवश्यक है। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा, क्योंकि इससे उन्हें पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी प्राप्त हुई।
नगर पालिका में जाकर आन्या ने जनता की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को भी करीब से देखा। उन्होंने ध्यानपूर्वक यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ समन्वय स्थापित कर समस्याओं का निराकरण किया जाता है। इस दौरान उन्हें सरकारी कर्मचारियों और महापौर दीपक बाली के बीच हुई चर्चाओं को सुनने का अवसर भी मिला, जिससे उन्हें प्रशासनिक कार्यों की गहराई और जटिलता का अनुभव हुआ। इसके अतिरिक्त आकांक्षा गार्डन के पास स्थित एक कॉलोनी के नवीनीकरण हेतु आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में भी उनकी सहभागिता रही, जहां उन्होंने विकास कार्यों की प्रक्रिया को समझा और जाना कि किस प्रकार योजनाओं को धरातल पर उतारा जाता है।

यह पूरा दिन आन्या मेहरोत्रा के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ, जिसने उनके जीवन को एक नई दिशा प्रदान की। एक सफल डॉक्टर परिवार से संबंध रखने वाली आन्या ने इस अनुभव के माध्यम से राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों के प्रति अपनी रुचि को विकसित किया। उन्होंने यह महसूस किया कि समाज की सेवा केवल एक पेशे तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करके भी समाज के विकास में योगदान दिया जा सकता है। इस अवसर ने न केवल उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया, बल्कि उन्हें अपने भविष्य के बारे में नए सिरे से सोचने के लिए भी प्रेरित किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आन्या मेहरोत्रा ने काशीपुर के महापौर दीपक बाली के प्रति गहरा आभार व्यक्त करते हुए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि काशीपुर वासियों के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्हें एक ऐसे प्रतिभाशाली, कर्मठ और समर्पित महापौर का नेतृत्व प्राप्त है, जो शहर के विकास और नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। आन्या ने भावुकता के साथ बताया कि इस पूरे अनुभव ने उन्हें जीवन की कई महत्वपूर्ण सीखें दी हैं, जिनमें जिम्मेदारी, धैर्य, नेतृत्व और सेवा भावना प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि एक दिन के इस विशेष अवसर ने उनके भीतर समाज के प्रति कुछ सकारात्मक करने की प्रेरणा को और अधिक सशक्त किया है। भविष्य में वह भी जनहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने की इच्छुक हैं। उनके शब्दों में आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय और नई ऊर्जा स्पष्ट रूप से झलक रही थी, जो इस पहल की सफलता को प्रमाणित करता है।

काशीपुर के महापौर दीपक बाली ने छात्रा आन्या मेहरोत्रा के एक दिन के मेयर के रूप में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आन्या ने जिस गंभीरता, समझदारी और जिम्मेदारी के साथ पूरे दिन प्रशासनिक गतिविधियों को जाना, वह वास्तव में प्रशंसनीय है। उन्होंने बताया कि इतनी कम उम्र में ही आन्या ने न केवल जनता की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना, बल्कि उनके समाधान की प्रक्रिया को भी समझने का प्रयास किया, जो उसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। दीपक बाली ने कहा कि आन्या जैसी प्रतिभाशाली छात्राएं समाज और देश का भविष्य हैं, जिन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर मिलना बेहद आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की पहल से बच्चों में नेतृत्व क्षमता विकसित होती है और वे जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में अग्रसर होते हैं। उन्होंने आन्या के आत्मविश्वास, सीखने की ललक और अनुशासन की विशेष रूप से प्रशंसा की।
विद्यालय में लौटकर आन्या मेहरोत्रा ने अपने अनुभवों को अन्य विद्यार्थियों के साथ साझा किया, जिससे सभी को इस अनूठे अवसर के बारे में जानने और उससे प्रेरणा लेने का मौका मिला। विद्यालय की प्रधानाचार्या मधुमिता बनर्जी ने उन्हें पुष्पगुच्छा भेंट कर सम्मानित किया और इस अवसर का पूर्ण रूप से लाभ उठाने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि आन्या ने न केवल स्वयं के लिए बल्कि पूरे विद्यालय के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। इसके साथ ही विद्यालय के सभी को-ऑर्डिनेटर और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी इस पहल की सराहना करते हुए आन्या के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस प्रकार यह कार्यक्रम शिक्षा और समाज के बीच एक सशक्त सेतु बनकर उभरा, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सही दिशा और अवसर मिलने पर युवा पीढ़ी देश के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।





