काशीपुर। गुरुवार को शहर की सफाई व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने के उद्देश्य से नगर निगम काशीपुर द्वारा एक सराहनीय और जनहितकारी पहल सामने आई, जब नगर क्षेत्र में निरूशुल्क कम्पोस्ट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मूल मकसद नागरिकों को यह समझाना था कि रोजमर्रा के गीले कचरे को बोझ नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन में कैसे बदला जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि यदि लोग अपने घरों से ही कचरे का सही प्रबंधन शुरू कर दें, तो न केवल शहर की सफाई व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाया जा सकेगा। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौजूदगी इस बात का संकेत थी कि स्वच्छता और हरित भविष्य को लेकर लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है। निगम की इस पहल को शहरवासियों ने खुले दिल से सराहा और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक प्रयास बताया।
इस जागरूकता कार्यक्रम में नागरिकों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों और नगर निगम के अधिकारियों ने सरल शब्दों में समझाया कि किस प्रकार रसोई से निकलने वाला गीला कचरा, जैसे सब्जियों के छिलके, फल के अवशेष और भोजन के बचे हिस्से, घर पर ही कम्पोस्ट में बदले जा सकते हैं। लोगों को यह भी बताया गया कि सूखे कचरे को अलग रखने से पुनर्चक्रण की प्रक्रिया आसान होती है और कचरे का अनावश्यक ढेर लैंडफिल तक पहुंचने से रोका जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान दिए गए व्यावहारिक उदाहरणों ने नागरिकों को खासा प्रभावित किया, क्योंकि इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि थोड़ी सी सावधानी और आदतों में बदलाव से बड़ा फर्क लाया जा सकता है। नगर निगम का यह प्रयास केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों को व्यवहारिक रूप से प्रेरित करने का माध्यम भी बना।

कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में घर पर ही कम्पोस्ट तैयार करने की आसान और कारगर विधियों का प्रदर्शन भी किया गया। अधिकारियों और सफाई कर्मियों ने बताया कि किस तरह सामान्य डिब्बों या गड्ढों का उपयोग कर गीले कचरे से प्राकृतिक खाद बनाई जा सकती है। इस प्रक्रिया में न तो अधिक खर्च आता है और न ही किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता होती है। लोगों को यह भी समझाया गया कि तैयार कम्पोस्ट का उपयोग अपने बगीचे, गमलों और पौधों में करने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है। इस जानकारी को पाकर कई नागरिकों ने तुरंत ही अपने घरों में कम्पोस्ट बनाने की इच्छा जताई। कार्यक्रम में मौजूद स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी इस प्रक्रिया में विशेष रुचि दिखाई और इसे घरेलू स्तर पर अपनाने की बात कही।
आयोजन के दौरान पहले से तैयार कम्पोस्ट का निरूशुल्क वितरण भी किया गया, ताकि नागरिक इसके लाभों को प्रत्यक्ष रूप से महसूस कर सकें। लोगों को बताया गया कि इस प्राकृतिक खाद के इस्तेमाल से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं, फसलों और फूलों की वृद्धि बेहतर होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। साथ ही, कम्पोस्ट के उपयोग से कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे लैंडफिल साइटों पर दबाव कम होता है और प्रदूषण पर भी नियंत्रण रहता है। कार्यक्रम में शामिल कई लोगों ने कम्पोस्ट को अपने साथ घर ले जाकर तुरंत उपयोग करने की बात कही। इस प्रत्यक्ष अनुभव ने नागरिकों के मन में यह विश्वास पैदा किया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है।
नगर निगम की इस पहल को शहर को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रत्येक परिवार गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करना शुरू कर दे, तो शहर की सफाई व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार हो सकता है। इससे न केवल नगर निगम पर आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि स्वच्छ शहर का सीधा संबंध नागरिकों के स्वास्थ्य से है और कचरे का सही प्रबंधन कई बीमारियों को रोकने में सहायक हो सकता है। नगर निगम का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, ताकि लोगों में जागरूकता बनी रहे और स्वच्छता अभियान जनआंदोलन का रूप ले सके।
इस अवसर पर कार्यक्रम की सफलता में कई अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका रही। सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल शाह ने नागरिकों को संबोधित करते हुए स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। सहायक नगर आयुक्त शालिनी नेगी ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। सफाई निरीक्षक मनोज बिष्ट ने कचरा प्रबंधन की तकनीकी जानकारी साझा की और लोगों को व्यावहारिक सुझाव दिए। इसके साथ ही पार्षद गण और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और नागरिकों को प्रेरित किया कि वे अपने-अपने स्तर पर इस पहल को आगे बढ़ाएं।

समग्र रूप से देखा जाए तो इस निरूशुल्क कम्पोस्ट वितरण कार्यक्रम ने शहर में स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार किया। बड़ी संख्या में आमजन की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि यदि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो लोग बदलाव के लिए तैयार रहते हैं। नगर निगम काशीपुर की यह पहल न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए उपयोगी है, बल्कि आने वाले समय में एक स्वच्छ, स्वस्थ और हरित शहर की नींव रखने का काम भी करेगी। कार्यक्रम के अंत में नागरिकों ने उम्मीद जताई कि ऐसे प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे और शहर को स्वच्छता के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी।





