काशीपुर। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित मॉनसून सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया, जबकि इसे 22 अगस्त तक चलने का प्रस्तावित किया गया था। इस अचानक निर्णय ने राज्य की राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया और विभिन्न दलों में गहन प्रतिक्रिया पैदा कर दी। कांग्रेस ने देहरादून में सड़कों पर उतरकर भाजपा सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड विरोधी निर्णयों और जनता के मुद्दों की अनदेखी के आरोप लगाए। इस पर काशीपुर के विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई और इससे जनता के समस्याओं को समय पर हल कराने का अवसर खो गया, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
त्रिलोक सिंह चीमा ने बताया कि इस सत्र में कुल डेढ़ दिन ही सदन की कार्यवाही हुई, जिसमें 2 घंटे 40 मिनट से भी कम समय सदन की कार्यवाही को मिला। उन्होंने कहा कि भाजपा के सभी विधायक सदन में अनुशासन और नियमों का पालन करते हैं, जबकि विपक्ष द्वारा बार-बार कार्यवाही रोकी गई। उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए बताया कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने दस्तावेज फाड़े और टेबल पर किताबें फेंकी, जिससे सदन की गरिमा पर आघात पहुंचा। त्रिलोक सिंह चीमा ने लोकतंत्र के प्रति इस व्यवहार को अस्वीकार्य बताया और कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल बहस और सुझाव देना होना चाहिए, न कि सदन की कार्यवाही में व्यवधान डालना।
विधायक ने आगे कहा कि विपक्ष के हंगामे के कारण कई अहम जनहित के मुद्दे उठाए नहीं जा सके। उन्होंने विशेष रूप से काशीपुर और राज्य के अन्य क्षेत्रों की समस्याओं पर ध्यान दिलाया और बताया कि भाजपा के विधायक सदन में अनुशासित रहते हैं तथा किसी भी निर्णय में बाधा नहीं डालते, लेकिन विपक्ष के रवैये से कार्यवाही प्रभावित हुई। त्रिलोक सिंह चीमा ने सदन में हुए खर्च और जनता के पैसे के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश को सही दिशा में आगे बढ़ाने और समय पर निर्णय लेने के लिए सदन का सुचारु रूप से चलना अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर उन्होंने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 का भी उल्लेख किया। त्रिलोक सिंह चीमा ने बताया कि यह विधेयक राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को समान अधिकार और प्रणालीगत पहचान प्रदान करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी जैसे सभी अल्पसंख्यक समुदाय शामिल हैं। इसके तहत उत्तराखंड स्टेट अल्पसंख्यक एजुकेशन अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो इन संस्थानों की निगरानी करेगी और उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित करवाएगी।
त्रिलोक सिंह चीमा ने विस्तार से बताया कि इस बिल के अंतर्गत सभी संस्थानों का पंजीकरण सोसायटी एक्ट या कंपनीज एक्ट के तहत होना अनिवार्य है और बैंक खाते संस्थाओं के नाम पर ही खुलवाने होंगे। यदि कोई संस्था नियमों का पालन नहीं करती है तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा सभी अल्पसंख्यक संस्थानों को अपनी स्थानीय भाषा में शिक्षा देने का विकल्प दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन द्वारा निर्धारित शिक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने हमेशा समानता, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इस विधेयक के पारित होने से सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर मिलेंगे और राज्य की शिक्षा प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी। त्रिलोक सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि यह बिल किसी भी एक समुदाय को लाभ देने के लिए नहीं है, बल्कि सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान अधिकार और पहचान प्रदान करने के लिए है।
सदन में हुए घटनाक्रम पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हर विधायक अपने क्षेत्र की समस्याएं विधानसभा में उठाता है, लेकिन कांग्रेस के हंगामे के कारण यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में विपक्ष अपने रवैये में बदलाव लाएगा और विधानसभा में सभी मुद्दे सही तरीके से उठाए जा सकेंगे। उन्होंने मीडिया का धन्यवाद करते हुए कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जनता तक सच्चाई पहुंचाने का अवसर मिला। उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने और जनता के हित में काम करने पर विशेष जोर दिया।
त्रिलोक सिंह चीमा ने अंत में कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 राज्य के इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम है। यह बिल सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को समान अवसर और अधिकार प्रदान करेगा और राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और मानक में सुधार लाएगा। उन्होंने दोहराया कि यह विधेयक किसी विशेष समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी अल्पसंख्यक समुदायों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए है। इसके माध्यम से प्रदेश की शिक्षा प्रणाली मजबूत होगी और भविष्य में विधानसभा की कार्यवाही को सभी बाधाओं से मुक्त रखा जा सकेगा।
विधायक ने काशीपुर में रोडवेज बस स्टेशन की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है और आने वाले विधानसभा सत्र में इसे जोर-शोर से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को नए स्थान पर शिफ्ट करने की योजना पहले ही शुरू की जा चुकी है और वह लगातार इस मुद्दे पर निगरानी रख रहे हैं। उनका उद्देश्य काशीपुर के नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान हो सके।
त्रिलोक सिंह चीमा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका काम केवल क्षेत्रीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राज्य स्तर पर सभी जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक सदन में अनुशासन और पारदर्शिता के साथ काम करते हैं और विपक्ष के रवैये के बावजूद वह लगातार जनता के हित में काम करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी सत्रों में प्रदेश की जनता के लिए सकारात्मक और ठोस निर्णय लिए जाएंगे और सदन सुचारु रूप से चलेगा।



