रामनगर। उत्तराखंड में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर इस वर्ष शिक्षा विभाग ने ऐसी व्यापक और सुदृढ़ व्यवस्था तैयार की है, जिसने साफ संकेत दे दिया है कि इस बार परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। लगभग 2 लाख 15 हजार परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और पूर्णतः नकलविहीन बनाने के लिए विभाग ने बहुस्तरीय निगरानी तंत्र लागू किया है। बीते वर्षों में तकनीकी उपकरणों के बढ़ते दुरुपयोग और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार तैयारियों को और अधिक कठोर तथा व्यवस्थित रूप दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि छात्रों के शैक्षणिक जीवन की निर्णायक कसौटी है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता सर्वाेपरि है। विभागीय स्तर पर कई दौर की बैठकों के बाद सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक समन्वय को लेकर ठोस रणनीति बनाई गई है, ताकि परीक्षा का प्रत्येक चरण सुव्यवस्थित और निष्पक्ष ढंग से संचालित हो सके।
प्रदेश भर में इस बार कुल 1,261 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां निर्धारित तिथियों के अनुसार परीक्षाएं संपन्न कराई जाएंगी। इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 21 फरवरी से प्रारंभ होकर 20 मार्च तक चलेंगी, जबकि हाईस्कूल की परीक्षाएं 23 फरवरी से शुरू होकर 20 मार्च को समाप्त होंगी। इतने बड़े पैमाने पर परीक्षा आयोजन को देखते हुए शिक्षा विभाग ने केंद्र व्यवस्थापकों, परीक्षा निरीक्षकों और कोऑर्डिनेटरों की जिम्मेदारियां पहले ही स्पष्ट कर दी हैं। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर व्यवस्थाओं का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया है, जिसमें बैठने की क्षमता, सुरक्षा इंतजाम, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा शामिल है। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी केंद्र पर परीक्षार्थियों को असुविधा नहीं होनी चाहिए। परीक्षा संचालन की प्रत्येक कड़ी को समयबद्ध और जवाबदेह बनाने के लिए लिखित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि समूची प्रक्रिया में एकरूपता और अनुशासन बना रहे।
सुरक्षा प्रबंधन को लेकर इस वर्ष विशेष सतर्कता बरती गई है और प्रश्न पत्रों की गोपनीयता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई है। सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को प्रश्न पत्र समय से पूर्व उपलब्ध करा दिए गए हैं, जिन्हें संबंधित विद्यालयों में डबल लॉक प्रणाली के तहत सुरक्षित रखा गया है। इस व्यवस्था के तहत दो अलग-अलग अधिकृत व्यक्तियों की उपस्थिति में ही ताला खोला जा सकेगा, जिससे पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित होगा। विभाग का स्पष्ट संदेश है कि प्रश्न पत्र लीक जैसी घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाने के लिए यह प्रणाली लागू की गई है। प्रश्न पत्रों के परिवहन, भंडारण और वितरण की प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय रखा गया है तथा संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय से पूर्व किसी भी परिस्थिति में लिफाफा न खोला जाए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे। परीक्षा समाप्त होने के पश्चात उत्तर पुस्तिकाओं को सावधानीपूर्वक पैक कर निर्धारित स्ट्रॉन्ग रूम में जमा कराया जाएगा। स्ट्रॉन्ग रूम में प्रवेश और निकासी की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित रहेगी और प्रत्येक गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं की सीलिंग, सुरक्षित परिवहन और जमा करने की प्रक्रिया के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। निगरानी दल समय-समय पर इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे, जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या लापरवाही की संभावना समाप्त हो सके। शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित रहती है तो परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता स्वतः सुदृढ़ हो जाती है।
राज्य के 1,261 परीक्षा केंद्रों में से 156 केंद्रों को संवेदनशील और 6 केंद्रों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन केंद्रों पर विशेष निगरानी और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। सीसीटीवी कैमरों की सक्रिय निगरानी के साथ-साथ विशेष उड़न दस्तों को भी तैनात किया गया है, जो परीक्षा के दौरान औचक निरीक्षण करेंगे। जिन क्षेत्रों में पूर्व में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं या जहां भीड़भाड़ अधिक रहती है, वहां अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सख्ती का उद्देश्य ईमानदार छात्रों के हितों की रक्षा करना है, ताकि मेहनत करने वाले परीक्षार्थियों को किसी भी प्रकार की अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े।
तकनीकी उपकरणों के दुरुपयोग को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष निगरानी की जाएगी। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। परीक्षार्थियों को केवल निर्धारित सामग्री ही साथ लाने की अनुमति होगी और प्रवेश द्वार पर जांच प्रक्रिया अनिवार्य होगी। परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में फोटोकॉपी की दुकानों और भीड़भाड़ पर नजर रखी जाएगी। इसके अतिरिक्त, परीक्षा केंद्रों के आसपास धारा 163 लागू रहेगी, जिससे अनाधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का मानना है कि बाहरी हस्तक्षेप रोककर ही परीक्षा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाया जा सकता है।

प्रशासनिक स्तर पर इस बार समन्वय को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि परीक्षा अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। शिक्षा विभाग ने पुलिस विभाग और जिला प्रशासन के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। जिलाधिकारियों, उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे परीक्षा केंद्रों का नियमित निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं को दुरुस्त बनाए रखें। परीक्षा के दिनों में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी, जिससे केंद्रों के बाहर भीड़ नियंत्रण और शांति व्यवस्था कायम रहे। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की उपस्थिति के दौरान छोटी सी लापरवाही भी बड़े व्यवधान का कारण बन सकती है, इसलिए प्रत्येक स्तर पर सतर्कता आवश्यक है। विभागीय बैठकों में यह भी तय किया गया है कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जाएगी और संबंधित अधिकारी मौके पर तत्काल पहुंचकर समाधान सुनिश्चित करेंगे।
व्यवस्थित निगरानी के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जिनमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। ये टीमें परीक्षा के दौरान औचक निरीक्षण करेंगी और यदि कहीं भी नकल या अन्य अनियमितता के संकेत मिलते हैं तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उड़न दस्तों को विशेष अधिकार दिए गए हैं कि वे बिना पूर्व सूचना के किसी भी परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर निरीक्षण कर सकें। विभाग का उद्देश्य यह है कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और अनुशासन दोनों कायम रहें। इसके साथ ही सभी केंद्र व्यवस्थापकों को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे परीक्षा कक्षों में बैठने की व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखें और प्रश्न पत्र वितरण तथा उत्तर पुस्तिका संग्रहण की प्रक्रिया को निर्धारित समयबद्ध तरीके से पूरा करें। प्रत्येक गतिविधि का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की शिकायत या विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध हो सके।
पारदर्शिता को इस वर्ष की परीक्षा प्रणाली का मूल आधार माना गया है और इसी दिशा में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा संचालन से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी की भूमिका तय की गई है और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। प्रश्न पत्र वितरण से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं की सीलिंग तक हर चरण के लिए मानक प्रक्रिया निर्धारित की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाते हैं तो किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना स्वतः समाप्त हो जाती है। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर त्वरित जांच के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का विश्वास है कि पारदर्शी प्रणाली से छात्रों और अभिभावकों का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।

इसी क्रम में परीक्षा केंद्रों की आधारभूत व्यवस्थाओं को भी परखा गया है, ताकि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रकाश व्यवस्था, पेयजल सुविधा, स्वच्छ शौचालय और पर्याप्त बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि अनुकूल वातावरण में ही छात्र अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं। परीक्षा के दिनों में केंद्रों पर समय से पूर्व प्रश्न पत्र पहुंचाने, निर्धारित समय पर परीक्षा प्रारंभ कराने और समाप्ति के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित तरीके से संकलित करने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे परीक्षा कक्षों में अनुशासन बनाए रखें और किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप को तुरंत रोकें। इन सभी उपायों का उद्देश्य यह है कि परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित हो और विद्यार्थियों को निष्पक्ष माहौल मिल सके।
उधर, दूसरी ओर परीक्षार्थियों में भी परीक्षा को लेकर उत्साह और गंभीरता दिखाई दे रही है। अंतिम समय में छात्र रिवीजन, मॉडल पेपर अभ्यास और समूह अध्ययन के माध्यम से अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। अभिभावक भी बच्चों के साथ खड़े होकर उनका मनोबल बढ़ा रहे हैं, क्योंकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं आगे की शैक्षणिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि सख्त निगरानी का उद्देश्य छात्रों पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि उन्हें निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर देना है। ईमानदारी से मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाना आवश्यक है कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन पूरी पारदर्शिता के साथ होगा।
समग्र रूप से देखा जाए तो उत्तराखंड में इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अभूतपूर्व तैयारी की गई है। 1,261 परीक्षा केंद्रों पर बहुस्तरीय निगरानी, 156 संवेदनशील और 6 अति संवेदनशील केंद्रों पर विशेष सतर्कता, डबल लॉक में प्रश्न पत्रों की सुरक्षा, स्ट्रॉन्ग रूम में उत्तर पुस्तिकाओं का सुरक्षित संरक्षण, धारा 163 की लागू व्यवस्था, पुलिस और प्रशासन का समन्वित सहयोग तथा औचक निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं यह स्पष्ट करती हैं कि सिस्टम किसी भी प्रकार की अनियमितता के लिए तैयार नहीं है। शिक्षा विभाग को भरोसा है कि इन ठोस कदमों के माध्यम से लगभग 2 लाख 15 हजार परीक्षार्थियों की परीक्षाएं शांतिपूर्ण, पारदर्शी और पूरी तरह नकलविहीन वातावरण में संपन्न कराई जा सकेंगी। यदि व्यवस्थाएं इसी तरह प्रभावी ढंग से लागू रहीं तो न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होगी, बल्कि उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था की साख भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।





