काशीपुर। उत्तराखंड की न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अधिवक्ताओं के लिए आगामी 17 तारीख एक ऐतिहासिक और निर्णायक अवसर के रूप में देखी जा रही है, जब पूरे प्रदेश में बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के लिए चुनाव संपन्न होने जा रहे हैं। इस चुनाव प्रक्रिया के अंतर्गत कुल 23 प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा, जिनमें से पांच स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। यह चुनाव न केवल एक नियमित लोकतांत्रिक प्रक्रिया है बल्कि अधिवक्ता समुदाय के भविष्य, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। प्रदेशभर के अधिवक्ताओं के बीच इस चुनाव को लेकर व्यापक चर्चा और उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है। लंबे समय से अधिवक्ता वर्ग अपने अधिकारों, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर अनेक चुनौतियों का सामना करता आया है। पूर्व उपसचिव काशीपुर बार अधिवक्ता सिंधु आकाश का मानना है कि यह चुनाव केवल प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अधिवक्ता समाज के समग्र विकास और उनकी पेशेवर गरिमा को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
पूर्व उपसचिव काशीपुर बार अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, तब अधिवक्ताओं के अधिकारों और हितों की रक्षा के उद्देश्य से बार काउंसिल की स्थापना की गई थी। समय-समय पर इसके चुनाव भी होते रहे हैं, लेकिन अधिवक्ता समुदाय के बीच यह भावना लगातार बनी रही कि चुनावों के दौरान किए गए वादे पूरी तरह धरातल पर लागू नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग है और उनकी भूमिका केवल न्यायालय तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज में न्याय और अधिकारों की रक्षा का भी महत्वपूर्ण दायित्व अधिवक्ताओं पर होता है। इसके बावजूद अधिवक्ताओं को कई बार बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा के अभाव से जूझना पड़ता है। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान केवल चुनावी घोषणाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए ठोस कार्ययोजना और ईमानदार प्रयासों की आवश्यकता है।
अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि अधिवक्ता समुदाय की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक आकस्मिक मृत्यु, दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों के दौरान बीमा सुविधा का अभाव है। उन्होंने बताया कि कई बार अधिवक्ता अपने कार्य के दौरान अत्यधिक तनाव और जोखिम का सामना करते हैं, लेकिन यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो उनके परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इसे दूर करने के लिए प्रभावी बीमा योजना लागू करना अत्यंत आवश्यक है। अधिवक्ता सिंधु आकाश का कहना है कि यदि अधिवक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा और बीमा सुविधा प्रदान की जाए तो इससे उनके परिवारों को भी आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी और अधिवक्ता अपने कार्य को अधिक आत्मविश्वास के साथ कर पाएंगे।
अधिवक्ता सिंधु आकाश यह भी कहा कि अधिवक्ता पेंशन योजना लंबे समय से अधिवक्ता समुदाय की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मांगों में शामिल रही है, जिस पर अब ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। अधिवक्ता सिंधु आकाश के अनुसार, अधिवक्ता अपने जीवन का बड़ा हिस्सा न्यायिक सेवा, समाज में न्याय की स्थापना और लोगों के अधिकारों की रक्षा में समर्पित कर देते हैं, लेकिन जब वे वृद्धावस्था में पहुंचते हैं तो उनके सामने आर्थिक असुरक्षा की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अधिवक्ताओं के लिए कोई सशक्त और व्यवस्थित आर्थिक सुरक्षा योजना उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें अपने जीवन के अंतिम चरण में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि अधिवक्ताओं को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन प्रदान करने के लिए पेंशन योजना लागू किया जाना बेहद आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि प्रभावी पेंशन योजना लागू हो जाती है तो इससे अधिवक्ता समाज को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और युवा अधिवक्ताओं में भी इस पेशे के प्रति विश्वास और आकर्षण बढ़ेगा।
अधिवक्ता सिंधु आकाश ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अधिवक्ता कई बार संवेदनशील और आपराधिक मामलों में कार्य करते हैं, जहां उन्हें धमकियों और हमलों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस कानून के माध्यम से अधिवक्ताओं पर हमले, धमकी और उत्पीड़न जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि इस विषय को लेकर लंबे समय से अधिवक्ता संगठन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया भी मांग करते रहे हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस परिणाम सामने नहीं आ पाए हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में महिलाओं के लिए पांच सीटों का आरक्षण एक दूरदर्शी और ऐतिहासिक फैसला है, जिसे माननीय सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली के आदेश के अनुरूप लागू किया गया है। अधिवक्ता सिंधु आकाश का मानना है कि यह निर्णय केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि विधिक क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम भी है। उन्होंने महिला अधिवक्ताओं से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों, सम्मान और पेशेवर हितों को ध्यान में रखते हुए मतदान प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि जब महिला प्रतिनिधियों की संख्या और भागीदारी मजबूत होगी तो अधिवक्ता समाज में संतुलन, संवेदनशीलता और समावेशिता का वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने यह भी कहा कि महिला प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका से महिला अधिवक्ताओं से जुड़ी समस्याओं, सुविधाओं और सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को उचित प्राथमिकता मिल सकेगी, जिससे अधिवक्ता समाज का समग्र विकास संभव हो पाएगा।
अधिवक्ता सिंधु आकाश ने चुनावी पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों के दौरान प्रत्याशियो द्वारा अपने आय और व्यय का सार्वजनिक विवरण अधिवक्ता समुदाय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए। उनका कहना है कि यदि एक मजबूत और उत्तरदायी बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड का गठन करना है तो चुनाव प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाना अत्यंत आवश्यक है। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रत्याशियों को अपनी आर्थिक स्थिति, चुनावी व्यय और अधिवक्ता हितों से जुड़ी कार्य योजनाओं का विस्तृत और स्पष्ट विवरण अधिवक्ताओं के सामने रखना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक अधिवक्ता समुदाय का विश्वास मजबूत नहीं हो सकेगा और संस्था की साख भी प्रभावित होती रहेगी।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मजबूत स्तंभ माना जाता है, जिसके बिना न्यायिक प्रणाली की कल्पना भी अधूरी है, लेकिन इसके बावजूद अधिवक्ताओं को अपने पेशे के दौरान अनेक जटिल चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि अधिवक्ता न्याय प्रणाली के प्रथम अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं और उन्हें समाज में न्याय सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी निभानी होती है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता केवल पक्षकारों का प्रतिनिधित्व ही नहीं करते, बल्कि न्यायालय और समाज के बीच संतुलन स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अधिवक्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी तो इसका सीधा असर न्याय व्यवस्था की कार्यक्षमता और निष्पक्षता पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि अधिवक्ताओं को सुरक्षित और सशक्त वातावरण प्रदान करना न्यायिक व्यवस्था को मजबूत और भरोसेमंद बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि पूरे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बार काउंसिल चुनाव को लेकर अधिवक्ता समुदाय के भीतर गंभीर और व्यापक चर्चा का वातावरण बन चुका है। उन्होंने बताया कि विभिन्न अधिवक्ता संगठन और वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की कार्यशैली, अनुभव, ईमानदारी और उनके द्वारा पूर्व में किए गए कार्यों का गहन मूल्यांकन कर रहे हैं। उनके अनुसार यह चुनाव केवल प्रतिनिधियों को चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह अधिवक्ताओं के अधिकारों, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय है। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने अधिवक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि मतदान करते समय व्यक्तिगत पहचान, मित्रता या किसी प्रकार के दबाव से प्रभावित होने के बजाय उम्मीदवारों की योग्यता, उनकी दूरदर्शिता और अधिवक्ता हितों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जागरूक और समझदारी से किया गया मतदान ही अधिवक्ता समाज को मजबूत नेतृत्व प्रदान कर सकता है।
उन्होंने कहा कि यह चुनाव अधिवक्ता समाज के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य को आकार देने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक अवसर है, जिसे किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के सम्मान, अधिकारों, सुरक्षा और पेशेवर स्थिरता से जुड़ा हुआ एक ऐतिहासिक पड़ाव है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि अधिवक्ता समुदाय पूरी जागरूकता, समझदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेगा तो एक मजबूत, दूरदर्शी और पारदर्शी नेतृत्व का निर्माण संभव हो सकेगा, जो अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठा सके। उन्होंने यह भी कहा कि एक सक्षम और उत्तरदायी बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड का गठन अधिवक्ताओं को सामाजिक सुरक्षा, पेशेवर सम्मान और आर्थिक स्थिरता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि यह समय एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा और उज्जवल भविष्य की नींव रखने का है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को भी सशक्त और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
अधिवक्ता सिंधु आकाश ने उत्तराखंड बार काउंसिल के प्रत्याशियों से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने चुनावी एजेंडा में अधिवक्ताओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिस प्रकार राजस्थान में एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी रूप से लागू किया गया है, उसी तर्ज पर उत्तराखंड में भी इस कानून को लागू करने के लिए गंभीर और ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं और यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी तो न्यायिक व्यवस्था की मजबूती भी प्रभावित हो सकती है। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि प्रत्याशियों को केवल चुनावी वादों तक सीमित न रहकर अधिवक्ताओं के हितों से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण कानूनों को लागू कराने की ठोस रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रभावी और सशक्त कानून लागू किया जाता है तो अधिवक्ताओं को व्यापक सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और पेशेवर आत्मविश्वास प्राप्त हो सकेगा, जिससे अधिवक्ता समाज के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक माहौल तैयार होगा तथा न्यायिक व्यवस्था और अधिक मजबूत और भरोसेमंद बन सकेगी।
अंत में अधिवक्ता सिंधु आकाश ने प्रदेश के समस्त अधिवक्ताओं से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनका प्रत्येक मत अत्यंत बहुमूल्य है और यह केवल प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे अधिवक्ता समाज के भविष्य की दिशा और दशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय अधिवक्ता समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में सामने आया है, जहां उन्हें अपने अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर सोच-समझकर निर्णय लेने की आवश्यकता है। अधिवक्ता सिंधु आकाश ने कहा कि यदि अधिवक्ता वर्ग संगठित होकर जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ मतदान करता है तो एक सक्षम और पारदर्शी बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड का गठन संभव हो सकेगा, जो अधिवक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठा सके। उन्होंने यह भी कहा कि एक मजबूत और उत्तरदायी नेतृत्व अधिवक्ताओं को भविष्य में किसी प्रकार की असुरक्षा या उपेक्षा से बचा सकता है तथा न्याय व्यवस्था को अधिक सशक्त, विश्वसनीय और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।





