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उत्तराखंड के सरकारी महकमों में अवैध भर्तियों के महाघोटाले पर मीनू गुप्ता ने खोला मोर्चा

चहेतों को पिछले दरवाजे से सरकारी नौकरियां बांटकर प्रदेश के होनहार और योग्य बेरोजगार युवाओं के हकों पर डाका डालने के इस बेहद सनसनीखेज खेल के खिलाफ मीनू गुप्ता ने अब मुख्यमंत्री तक सीधे साक्ष्य सौंपकर निष्पक्ष जांच और पूरी चयन प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की पुरजोर मांग उठाई है।

देहरादून। उत्तराखंड के अलग-अलग सरकारी महकमों में पिछले कुछ समय से चल रही बैकडोर एंट्रियों और नियमों को ताक पर रखकर दी जा रही नौकरियों के खेल का अब पूरी तरह से भंडाफोड़ होने की कगार पर पहुंच गया है। इस पूरे गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर राष्ट्रीय भ्रष्टाचार दमन परिषद (भारत) की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीनू गुप्ता ने अब सीधे तौर पर मोर्चा खोलते हुए शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों और नीति निर्माताओं के सामने अपनी गहरी चिंता तथा कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि राज्य के भीतर योग्य और होनहार युवाओं के हकों पर डाका डाला जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभिन्न विश्वसनीय समाचार माध्यमों, दैनिक अखबारों की रिपोर्टों और जमीनी स्तर से लगातार मिल रही पुख्ता सूचनाओं के आधार पर जब यह पूरा मामला राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीनू गुप्ता के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसकी गहराई से पड़ताल की और पाया कि पिछले कुछ सालों के दौरान कई महत्वपूर्ण विभागों में तयशुदा भर्ती नियमों, विज्ञापनों और योग्यता के पैमानों को पूरी तरह दरकिनार करके चहेतों को कुर्सियां बांटी गईं।

इस सनसनीखेज और व्यापक स्तर पर फैले गड़बड़झाले को उजागर करते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीनू गुप्ता ने सीधे तौर पर गंभीर आरोप मढ़े हैं कि बिना किसी पारदर्शी चयन प्रक्रिया और बिना किसी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय विज्ञप्ति के की गई इन अवैध नियुक्तियों के कारण उत्तराखंड के लाखों प्रतिभावान, शिक्षित और बेरोजगार युवाओं के सुनहरे भविष्य के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ हुआ है। दिन-रात मेहनत करने वाले प्रतियोगी छात्रों के रोजगार के जायज अवसरों को छीनकर अयोग्य लोगों को पिछले दरवाजे से सरकारी तंत्र में शामिल कर लिया गया, जिससे पूरी व्यवस्था की साख दांव पर लग गई है। इस पूरे महाघोटाले और अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीनू गुप्ता ने स्वयं कड़ा रुख अख्तियार किया और सूबे के मुख्यमंत्री को एक अत्यंत विस्तृत और गोपनीय शिकायती पत्र प्रेषित कर पूरे मामले की क्रोनोलॉजी से अवगत कराया है। उन्होंने केवल मौखिक शिकायत नहीं की है, बल्कि अपने दावों को साबित करने के लिए विभागों में हुई इन अवैध भर्तियों से जुड़े तमाम पुख्ता और अकाट्य साक्ष्य भी शासन के उच्च अधिकारियों को सौंप दिए हैं, ताकि दोषियों के बचने का कोई रास्ता न रहे। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले को तकनीकी रूप से भी दर्ज कराने के लिए आधिकारिक सीएम पोर्टल पर भी अपनी शिकायत को ऑनलाइन पंजीकृत कराया है, जिससे इस पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

शासन के शीर्ष स्तर पर जब यह गंभीर मामला पहुंचा और शुरुआती जांच-पड़ताल की सुगबुगाहट शुरू हुई, तो विभिन्न विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों से प्राप्त आंतरिक जानकारियों और गुप्त सूचनाओं के आधार पर यह कड़वा सच आधिकारिक तौर पर सामने आ गया कि वाकई में कुछ विशिष्ट मामलों में निर्धारित चयन प्रक्रियाओं और विधिक नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई थीं। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मीनू गुप्ता ने इस बात पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब-जब शासन स्तर पर बिना किसी पारदर्शी, खुली और निष्पक्ष प्रक्रिया के नौकरियां बांटी जाती हैं, तब-तब प्रदेश के आम और गरीब युवाओं का पूरी प्रशासनिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक ढांचे और सरकार की नीयत से भरोसा पूरी तरह उठ जाता है। इस प्रकार की अपारदर्शी और संदेहास्पद गतिविधियां न केवल वर्तमान पीढ़ी को कुंठा और अवसाद की गर्त में धकेलती हैं, बल्कि आने वाले समय में राज्य के भीतर रोजगार की स्वस्थ संभावनाओं और निवेश के माहौल पर भी बेहद गहरा और दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इसी वजह से राष्ट्रीय भ्रष्टाचार दमन परिषद के बैनर तले इस संवेदनशील विषय पर शासन के वरिष्ठतम नीति निर्माताओं और संबंधित विभागों के आला अफसरों के साथ लगातार कड़ा संवाद स्थापित किया जा रहा है और बिना किसी दबाव के पूरी तरह से निष्पक्ष, उच्च स्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग पुरजोर तरीके से की जा रही है।

उत्तराखंड के बेरोजगारों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहीं मीनू गुप्ता ने अब प्रदेश सरकार के सामने बेहद स्पष्ट और दो-टूक शब्दों में अपनी मांगें रख दी हैं कि जिन-जिन सरकारी विभागों की नियुक्तियों में नियमों के उल्लंघन, भाई-भतीजावाद या अपारदर्शिता के गंभीर आरोप प्रारंभिक या विस्तृत जांच में प्रमाणित पाए जाते हैं, उन सभी नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह से अवैध, अमान्य और शून्य घोषित कर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने व्यापक जनहित, सामाजिक न्याय और देवभूमि के लाखों युवाओं के उज्ज्वल एवं सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार से अपील की है कि वह राज्य में बड़े पैमाने पर बिल्कुल नई, पारदर्शी, आधुनिक और पूरी तरह से निष्पक्ष भर्ती प्रक्रियाएं अविलंब शुरू करे। इन नई भर्तियों में तकनीक का सहारा लिया जाए और पूरी चयन प्रक्रिया को इस तरह से डिजाइन किया जाए ताकि राज्य के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक के हर एक योग्य, प्रतिभावान और हकदार अभ्यर्थी को सरकारी रोजगार पाने के समान, निष्पक्ष और गरिमापूर्ण अवसर उपलब्ध हो सकें। अंत में उन्होंने संकल्प दोहराते हुए साफ कर दिया कि राष्ट्रीय भ्रष्टाचार दमन परिषद देश और प्रदेश के युवाओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने और असल मायनों में सुशासन की स्थापना के लिए अपने इस जनांदोलन और कानूनी संघर्ष को भविष्य में भी इसी तरह पूरी आक्रामकता के साथ जारी रखेगी।

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