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उत्तराखंड के गन्ना किसानों की चमकी किस्मत और सरकार ने खोला 35.30 करोड़ का भारी खजाना

आयुक्त त्रिलोक सिंह मर्तोलिया के बड़े फैसले से गदगद हुए अन्नदाता, चीनी मिलों को भारी बजट आवंटित कर सीधे बैंक खातों में पैसा भेजने के कड़े निर्देश, मुख्यमंत्री की किसान हितैषी नीति ने मचाई धूम।

काशीपुर। उत्तराखंड के मिठास भरे खेतों में पसीना बहाने वाले गन्ना किसानों के लिए आज का दिन खुशियों की नई सौगात लेकर आया है, क्योंकि प्रदेश सरकार ने उनके बकाया भुगतान की राह में खड़ी वित्तीय बाधाओं को पूरी तरह दूर कर दिया है। गन्ने की खेती को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानने वाले मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। इस ऐतिहासिक फैसले की जानकारी देते हुए आयुक्त, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, उत्तराखण्ड त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने अधिकारिक रूप से अवगत कराया है कि आज दिनांक 31 मार्च, 2026 को शासन ने किसानों के आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए खजाने के द्वार खोल दिए हैं। राज्य की सहकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की चीनी मिलों को पेराई सत्र 2025-26 के अंतर्गत आपूर्ति किए गए गन्ने के अवशेष मूल्य के भुगतान हेतु कुल 35.30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि आवंटित कर दी गई है। श्री त्रिलोक सिंह मर्तोलिया के अनुसार, यह कदम न केवल किसानों की जेब भरेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने का काम करेगा, जिससे आगामी त्यौहारों और खेती के नए चक्र के लिए किसानों को किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।

वित्तीय विवरणों की गहराई में उतरें तो इस विशाल धनराशि का सबसे बड़ा हिस्सा ऊधमसिंह नगर जनपद के खाते में गया है, जो राज्य के गन्ना उत्पादन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। आयुक्त त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने स्पष्ट किया कि जनपद ऊधमसिंह नगर स्थित चीनी मिल बाजपुर के लिए अकेले 20.30 करोड़ रुपये की विशेष धनराशि जारी की गई है, जो वहां के हजारों किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही, चीनी मिल नादेही, किच्छा एवं डोईवाला के गन्ना उत्पादकों के हितों को सुरक्षित करते हुए प्रत्येक मिल के लिए 5-5 करोड़ रुपये की किश्त निर्गत की गई है। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए भुगतान संबंधी बिलों को तत्काल कोषागार को प्रेषित कर दिया गया है, ताकि बिना किसी कागजी देरी के पैसा सही जगह पहुंच सके। त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस आवंटन से उन क्षेत्रों में आर्थिक तरलता बढ़ेगी जहां किसान लंबे समय से अपने बकाया का इंतजार कर रहे थे, और यह वितरण राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण है जिसमें किसान की खुशहाली को ही शासन की असली सफलता माना गया है।

प्रशासनिक मशीनरी अब इस जारी धनराशि को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह सक्रिय मोड में आ गई है, और इसके लिए बकायदा कड़े दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। आयुक्त ने गन्ना समितियों को सख्त लहजे में निर्देशित किया है कि जैसे ही चीनी मिलों से धनराशि प्राप्त होती है, वे बिना किसी हीला-हवाली के गन्ना समितियों के माध्यम से तत्काल किसानों के व्यक्तिगत बैंक खातों में पैसा हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूर्ण करें। त्रिलोक सिंह मर्तोलिया ने भरोसा दिलाया है कि सरकार केवल यहीं नहीं रुकने वाली है, बल्कि किसानों की सर्वांगीण उन्नति के लिए वह पूरी तरह कटिबद्ध है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गन्ना किसानों के पेराई सत्र 2025-26 के जो भी अन्य अवशेष गन्ना मूल्य बचे हुए हैं, उनका भुगतान भी चीनी मिलों द्वारा बहुत जल्द सुनिश्चित किया जाएगा। इस दौरान प्रचार एवं जनसम्पर्क अधिकारी, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग, उत्तराखण्ड नीलेश कुमार ने भी पुष्टि की कि विभाग का लक्ष्य शून्य देरी के साथ किसान के पसीने की पूरी कीमत चुकाना है, जिससे भविष्य में गन्ने की बुवाई के प्रति काश्तकारों का उत्साह बना रहे और उत्तराखंड चीनी उत्पादन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर सके।

इस सरकारी घोषणा के बाद उत्तराखंड के गन्ना बेल्ट में उत्साह का माहौल है और किसान संगठन इसे अपनी मेहनत की जीत के रूप में देख रहे हैं। आयुक्त त्रिलोक सिंह मर्तोलिया के नेतृत्व में विभाग ने जिस तत्परता से 31 मार्च की समय सीमा के भीतर यह बड़ी राशि जारी की है, उससे शासन की कार्यशैली पर जनता का भरोसा और भी सुदृढ़ हुआ है। नीलेश कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि किसान हमारे अन्नदाता हैं और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के बिना राज्य की प्रगति अधूरी है। यह 35.30 करोड़ रुपये की राशि मात्र एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के सपनों की उड़ान है जो दिन-रात खेतों में कड़ी मेहनत करते हैं। सरकार की इस त्वरित कार्रवाई ने यह भी संदेश दिया है कि चीनी मिलों के प्रबंधन और गन्ना समितियों के बीच सामंजस्य बिठाकर भुगतान प्रणाली को अब आधुनिक और बाधा मुक्त बना दिया गया है। आने वाले दिनों में जब यह पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगा, तो इससे न केवल उनका कर्ज का बोझ कम होगा बल्कि वे कृषि के क्षेत्र में नए निवेश करने के लिए भी प्रोत्साहित होंगे, जो अंततः उत्तराखंड को एक आत्मनिर्भर और समृद्ध प्रदेश बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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