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उच्च शिक्षा प्रशिक्षण यात्रा से लौटे डॉ दीपक खाती और डॉ ममता जोशी का भव्य स्वागत

शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन भ्रमण के बाद डॉ. दीपक खाती और डॉ. ममता जोशी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अनुभव साझा किए, जिन्होंने ज्ञान, आध्यात्मिक ऊर्जा और नवाचार की प्रेरणा से सभी को रोमांचित किया।

रामनगर। उत्तराखंड सरकार की उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत आयोजित शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन भ्रमण में भाग लेने के बाद पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामनगर के वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. दीपक खाती एवं डॉ. ममता भदोला जोशी का महाविद्यालय में भव्य स्वागत किया गया। यह यात्रा 16 फरवरी से 21 फरवरी 2026 तक इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज में आयोजित की गई थी, जिसमें राज्य के विभिन्न जनपदों से आए कुल 40 प्राध्यापक सम्मिलित हुए। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों के शैक्षिक कौशल, सांस्कृतिक समझ और नेतृत्व क्षमता को उन्नत करना था, ताकि वे अपने विद्यार्थियों के लिए नवीन दृष्टिकोण और प्रेरणा का स्रोत बन सकें। इस दौरान प्रतिभागियों ने न केवल अकादमिक सत्रों में भाग लिया बल्कि सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन कर अपने अनुभव को और भी समृद्ध किया।

भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने प्रयागराज के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की यात्रा की, जिसमें त्रिवेणी संगम, इलाहाबाद किला, आनंद भवन, खुसरो बाग, सरस्वती घाट और हनुमान मंदिर (लेटे हनुमान जी) शामिल थे। इन स्थलों ने सभी प्रतिभागियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्र निर्माण के मूल्य के प्रति जागरूक किया। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के कॉमर्स संकाय, अर्थशास्त्र विभाग और विज्ञान संकाय का अवलोकन कर उन्होंने शैक्षिक दृष्टि से अपनी समझ को और गहरा किया। इस यात्रा के माध्यम से शिक्षकों ने शैक्षणिक नीतियों, अनुसंधान दृष्टिकोण और आधुनिक शिक्षण विधियों की जानकारी प्राप्त की, जो उनकी कक्षा और विद्यार्थियों के विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस प्रकार यह यात्रा केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध अनुभव रही।

महाविद्यालय पहुंचने पर प्राचार्य प्रो. एम सी पाण्डे, चीफप्राक्टर प्रो. एस एस मौर्य तथा समस्त महाविद्यालय परिवार ने डॉ. दीपक खाती एवं डॉ. ममता भदोला जोशी का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। स्वागत समारोह में दोनों प्राध्यापकों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि इस तरह के शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए नई ऊर्जा, व्यापक दृष्टिकोण और नवाचार की प्रेरणा का स्रोत होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा और विश्वविद्यालय में शिक्षण संस्थानों का अवलोकन शिक्षकों को न केवल शिक्षण कौशल में सुधार करने में मदद करता है, बल्कि उन्हें अपने जीवन और कार्य में नैतिकता, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की सीख भी देता है। ऐसे अनुभव भविष्य की पीढ़ियों के उज्ज्वल निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

इस शैक्षिक यात्रा में वाराणसी का भी भ्रमण शामिल था, जहां प्रतिभागियों ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। इसके अलावा, सारनाथ में भगवान बुद्ध के ज्ञान और उपदेशों से प्रेरणा ली गई, जिसने प्रतिभागियों के दृष्टिकोण को और व्यापक बनाया। इस दौरान शिक्षकों ने न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समझा बल्कि यह भी देखा कि किस प्रकार ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों का अध्ययन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में योगदान कर सकता है। इस प्रकार यात्रा ने शिक्षकों के भीतर ज्ञान, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय चेतना का अद्भुत संगम पैदा किया।

कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अरुण कुमार चतुर्वेदी ने इस सफल आयोजन के लिए माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत सिंह, निदेशक डॉ. वी. एन. खाली, उपनिदेशक प्रो. आर. एस. भकुनी, प्रो. एच. एस. नयाल एवं डॉ. गोविंद पाठक का विशेष आभार व्यक्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के यूजीसी एमएमटीटीसी केंद्र के निदेशक प्रो. प्रकाश जोशी और समस्त सहयोगियों की भी सराहना की, जिनकी मेहनत और मार्गदर्शन से यह यात्रा अत्यंत सफल रही। डॉ. अरुण कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि इस प्रकार की योजनाएं न केवल शिक्षकों के कौशल को बढ़ाती हैं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को समग्र रूप से बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

इस यात्रा से लौटने के बाद डॉ. दीपक खाती एवं डॉ. ममता भदोला जोशी ने महाविद्यालय में आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों और सहकर्मियों के साथ अपनी यात्रा से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए ऐसे कार्यक्रम सिर्फ व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं होते, बल्कि यह आत्मविकास, प्रेरणा और सांस्कृतिक समझ का समग्र मंच होते हैं। उनके अनुसार, विद्यार्थियों की शिक्षा को प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षकों का निरंतर सीखना और आत्मसुधार आवश्यक है। उन्होंने सभी शिक्षकों को प्रेरित किया कि वे इस अनुभव को अपने शैक्षणिक कार्यों में लागू करें और विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करें।

प्राचार्य प्रो. एम सी पाण्डे ने स्वागत समारोह के दौरान कहा कि डॉ. दीपक खाती और डॉ. ममता भदोला जोशी का उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेना महाविद्यालय के लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण शिक्षकों के ज्ञान को केवल अकादमिक सीमाओं तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध बनाते हैं। प्रो. पाण्डे ने जोर देते हुए कहा कि इन यात्राओं का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शिक्षक नई ऊर्जा, व्यापक दृष्टिकोण और नवाचार की प्रेरणा लेकर लौटते हैं, जो सीधे तौर पर विद्यार्थियों के सीखने और सोचने की क्षमता में वृद्धि करता है। उन्होंने आशा जताई कि डॉ. खाती और डॉ. जोशी अपने अनुभव और ज्ञान को महाविद्यालय में साझा करेंगे, जिससे शिक्षण प्रक्रिया और भी प्रभावशाली और प्रेरक बनेगी। प्रो. पाण्डे ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी पहलें महाविद्यालय में नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि शैक्षिक वातावरण और विद्यार्थियों की प्रतिभा का विकास सतत रूप से हो सके।

इस प्रकार, यह उच्च शिक्षा भ्रमण प्रशिक्षण न केवल शिक्षकों के व्यक्तिगत और पेशेवर विकास में सहायक साबित हुआ, बल्कि महाविद्यालय के शैक्षिक वातावरण और विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. दीपक खाती एवं डॉ. ममता भदोला जोशी के अनुभव महाविद्यालय में शिक्षा के स्तर को और उन्नत बनाने के लिए प्रेरक सिद्ध होंगे। भविष्य में ऐसी योजनाएं राज्य के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की उम्मीद की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों को व्यापक दृष्टि और समृद्ध अनुभव प्राप्त हो।

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