हरिद्वार। एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता के दौरान उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत हालिया बजट को लेकर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई। प्रेस क्लब हरिद्वार में मीडिया से बातचीत करते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने राज्य सरकार के बजट पर कड़ा हमला बोला और इसे पूरी तरह खोखला, दिशाहीन तथा केवल शब्दों और आंकड़ों का खेल बताया। उन्होंने कहा कि बजट में जो बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, वे जमीन पर वास्तविकता से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं। आलोक शर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य की जनता जिन गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, उनका समाधान इस बजट में कहीं भी नजर नहीं आता। उन्होंने यह भी कहा कि बजट को इस तरह पेश किया गया है मानो राज्य के विकास के लिए कोई बड़ा रोडमैप तैयार किया गया हो, लेकिन जब गहराई से इसे देखा जाता है तो यह स्पष्ट हो जाता है कि इसमें वास्तविक योजनाओं से अधिक आंकड़ों की बाजीगरी की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट के जरिए जनता को भ्रमित करने की कोशिश की है, जबकि राज्य के सामने खड़ी चुनौतियों का समाधान इसमें दिखाई नहीं देता।
राज्य की आर्थिक नीतियों और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए आलोक शर्मा ने कहा कि इस बजट में हरिद्वार जिले की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बजट में हरिद्वार के विकास के लिए कोई ठोस योजना या विशेष प्रावधान नहीं किया है। आलोक शर्मा ने कहा कि हरिद्वार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आर्थिक और पर्यटन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण जिला है, लेकिन इसके बावजूद बजट में इस क्षेत्र को वह महत्व नहीं दिया गया जिसकी उम्मीद की जा रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार से जुड़े भाजपा के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं। उनके अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि वे आंख, नाक और कान बंद करके बैठे हुए हैं और अपने क्षेत्र की उपेक्षा के बावजूद कोई आवाज नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के हितों के लिए ही आवाज नहीं उठाएंगे तो फिर जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
सरकार की बजट नीति को लेकर अपनी आलोचना को और तीखा करते हुए आलोक शर्मा ने कहा कि बजट में राज्य की मूलभूत समस्याओं का कोई उल्लेख ही नहीं दिखाई देता। उन्होंने कहा कि जिस उत्तराखंड में बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, उस राज्य के बजट में इन समस्याओं का समाधान खोजने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की गई है। उनके अनुसार बजट केवल आंकड़ों और घोषणाओं का दस्तावेज बनकर रह गया है, जिसमें वास्तविक योजनाओं की स्पष्टता का अभाव है। आलोक शर्मा ने कहा कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार सृजन की दिशा में भी बजट में कोई प्रभावी योजना दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि यदि रोजगार के अवसर पैदा नहीं किए जाएंगे तो राज्य के युवाओं का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा और बेरोजगारी की समस्या कैसे कम होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं की उम्मीदों के साथ न्याय नहीं किया है।
महंगाई के मुद्दे को उठाते हुए आलोक शर्मा ने सरकार से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि आम जनता पहले से ही बढ़ती महंगाई से परेशान है और ऐसे में बजट में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। उन्होंने हाल ही में गैस सिलेंडर के दामों में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने सवाल किया कि जब महंगाई लगातार बढ़ रही है तो सरकार इस बजट के माध्यम से जनता को क्या राहत देने जा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस बजट के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आएगी या फिर जनता को इसी तरह महंगे ईंधन का सामना करना पड़ेगा। उनके अनुसार सरकार को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए ताकि जनता को यह समझ में आ सके कि बजट से उन्हें वास्तव में क्या लाभ मिलने वाला है।
राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर भी आलोक शर्मा ने चिंता व्यक्त की और कहा कि बजट में इस महत्वपूर्ण विषय पर भी कोई ठोस योजना नजर नहीं आती। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था किसी भी राज्य के विकास की बुनियादी शर्त होती है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने इस क्षेत्र को गंभीरता से नहीं लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराध और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज करना राज्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। उनके अनुसार यदि कानून व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो निवेश, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिणाम नहीं मिल पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को इस दिशा में स्पष्ट और प्रभावी नीति बनानी चाहिए थी, लेकिन बजट में ऐसा कुछ भी दिखाई नहीं देता।
समाज के कमजोर वर्गों की स्थिति को लेकर भी आलोक शर्मा ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बजट में गरीबों, अल्पसंख्यकों, एससी और एसटी समुदायों के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उनके अनुसार इन वर्गों के लिए विशेष योजनाओं और सुविधाओं की आवश्यकता होती है ताकि उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समावेशी विकास की बात करती है तो उसे इन वर्गों के लिए ठोस योजनाएं बनानी चाहिए थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में इन वर्गों की जरूरतों को गंभीरता से नहीं लिया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में समाज के कमजोर वर्ग शामिल नहीं हैं।
उत्तराखंड की सबसे बड़ी समस्या पलायन को लेकर भी आलोक शर्मा ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार हो रहा पलायन एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्या बन चुका है। इसके बावजूद सरकार ने मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना के तहत केवल 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि जब राज्य का कुल बजट 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये का है तो उसमें पलायन जैसी बड़ी समस्या के समाधान के लिए केवल 10 करोड़ रुपये रखना बेहद अपर्याप्त है। उनके अनुसार इससे यह साफ दिखाई देता है कि सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पलायन को रोकना है तो इसके लिए व्यापक और दीर्घकालिक योजनाओं की आवश्यकता है, लेकिन बजट में ऐसी कोई स्पष्ट रणनीति दिखाई नहीं देती।
वन्यजीवों से होने वाले खतरे के मुद्दे को उठाते हुए आलोक शर्मा ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तेंदुए, भालू और हाथियों से लगातार खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में जंगली जानवरों के हमलों से लोगों की जान तक जा चुकी है और ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहता है। इसके बावजूद बजट में लोगों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस योजना नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि सरकार को इस समस्या का समाधान निकालने के लिए विशेष बजट और योजनाएं बनानी चाहिए थीं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनके अनुसार इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने पहाड़ी क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया है।
पर्यटन के मुद्दे पर भी आलोक शर्मा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है और इसे राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताती है, लेकिन बजट में पर्यटन विकास के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित नहीं की गई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी योजना के लिए केवल पांच करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो इस योजना के महत्व के मुकाबले बेहद कम है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है तो उसे इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश करना चाहिए था। उनके अनुसार सीमित बजट के साथ पर्यटन क्षेत्र में अपेक्षित विकास संभव नहीं है।
छात्रों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर भी आलोक शर्मा ने सरकार से सवाल किए। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति बढ़ाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई स्पष्ट पहल नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि इसी तरह वृद्धावस्था पेंशन और अन्य सामाजिक पेंशन योजनाओं में भी बढ़ोतरी की जरूरत है ताकि जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा योजना के अतिरिक्त 700 करोड़ रुपये के भार को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और सरकार को इस बारे में पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
पत्रकार वार्ता के अंत में आलोक शर्मा ने दोहराया कि उत्तराखंड सरकार का यह बजट पूरी तरह दिशाहीन प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य के समग्र विकास की कोई स्पष्ट तस्वीर दिखाई नहीं देती। उनके अनुसार बजट में केवल घोषणाएं और आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, लेकिन ठोस योजनाओं और स्पष्ट रणनीति का अभाव है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में राज्य के विकास के लिए गंभीर है तो उसे जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना होगा और उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। इस दौरान कांग्रेसी नेता सोम त्यागी, मनोज सैनी, संजय सैनी और गौरव चौहान भी मौजूद रहे और उन्होंने भी राज्य सरकार के बजट को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।





