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आईजीएल काशीपुर में एम एल भरतिया की पुण्यतिथि पर 270 लोगों ने किया रक्तदान

स्वर्गीय एम एल भरतिया की स्मृति में आयोजित सामाजिक पहल में आईजीएल प्रबंधन कर्मचारियों और चिकित्सकीय टीम की सहभागिता से बहुउद्देशीय भवन में सफल रक्तदान शिविर आयोजित हुआ, एल डी उपजिला चिकित्सालय काशीपुर की टीम ने सहयोग दिया।

काशीपुर।सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में काशीपुर स्थित रसायन उत्पादक प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्था इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड (आईजीएल) एक बार फिर अपनी परंपरा को निभाते हुए समाज के लिए प्रेरणादायक पहल करती नजर आई। कंपनी के संस्थापक परमपूज्य स्वर्गीय एम. एल. भरतिया की 19वीं पुण्यतिथि के अवसर पर संस्थान परिसर में एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कर्मचारियों, अधिकारियों तथा अन्य सामाजिक सहभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर मानवता की सेवा का संदेश दिया। आईजीएल के बहुउद्देशीय भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह से ही रक्तदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे परिसर में सेवा और सहयोग की भावना का वातावरण दिखाई दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत मुख्य अतिथि स्वपन किशोर, एसपी काशीपुर द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। दीप प्रज्वलन के साथ ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ और उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय एम. एल. भरतिया के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उपस्थित कर्मचारियों और अधिकारियों ने यह भी संकल्प लिया कि समाज की भलाई और मानव जीवन की रक्षा के लिए ऐसे प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।

संस्था के अधिशासी निदेशक आलोक सिंघल ने इस अवसर पर जानकारी देते हुए बताया कि आईजीएल द्वारा प्रत्येक वर्ष 10 मार्च को स्वर्गीय एम. एल. भरतिया की पुण्यतिथि पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है, ताकि समाज के जरूरतमंद लोगों को जीवनदायी रक्त उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि आईजीएल केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान रूप से महत्व देता है। इसी सोच के तहत कंपनी वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई कार्यक्रम संचालित करती रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष आयोजित रक्तदान शिविर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अन्य लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया और कुल 270 यूनिट रक्तदान किया गया। यह रक्तदान एल.डी उपजिला चिकित्सालय काशीपुर की टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा पुनीत कार्य है जो सीधे किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने में सहायक बनता है और यही कारण है कि आईजीएल परिवार के सदस्य हर वर्ष इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

उल्लेखनीय है कि रक्तदान शिविर के आयोजन के लिए आईजीएल प्रबंधन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं ताकि रक्तदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। आयोजन स्थल पर चिकित्सकों की टीम, आवश्यक चिकित्सा उपकरण, रक्त संग्रहण व्यवस्था तथा स्वास्थ्य जांच की समुचित व्यवस्था की गई थी। रक्तदान से पहले प्रत्येक रक्तदाता का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सके। एल.डी उपजिला चिकित्सालय काशीपुर की टीम ने पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया और रक्त संग्रहण के दौरान सभी मानकों का पालन किया गया। शिविर में मौजूद चिकित्सकों ने लोगों को रक्तदान के महत्व के बारे में भी जागरूक किया और बताया कि एक यूनिट रक्त किसी गंभीर रूप से बीमार मरीज या दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है। पूरे कार्यक्रम के दौरान आईजीएल के कर्मचारियों में विशेष उत्साह देखने को मिला और कई लोगों ने पहली बार रक्तदान करके समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

कार्यक्रम के दौरान आईजीएल प्रबंधन ने इस सफल आयोजन के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान की सराहना की। इस अवसर पर मानव संसाधन-प्रशासन-लाईजनिंग हेड राजेश कुमार सिंह की भूमिका को विशेष रूप से उल्लेखित किया गया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम के समन्वय और संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी प्रकार डॉ आरके शर्मा हेड एच.एस.ई ने स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की निगरानी करते हुए कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम संयोजक डॉ. गौरव मुंद्रा हेड चिकित्सा सेवा आईजीएल ने भी चिकित्सा टीम के साथ मिलकर रक्तदान की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संचालित किया। उनके नेतृत्व में चिकित्सा विभाग ने सुनिश्चित किया कि रक्तदाताओं को सुरक्षित वातावरण में रक्तदान करने का अवसर मिले और उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी प्रदान किया जाए।

इस आयोजन की सफलता में प्रशासनिक और प्रबंधन टीम के कई सदस्यों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। विक्रांत चौधरी सहायक महाप्रबंधक प्रशासन ने आयोजन की व्यवस्थाओं को संभालते हुए पूरे कार्यक्रम को सुव्यवस्थित बनाए रखने में सहयोग दिया। इसी क्रम में रितेश पांडे वरिष्ठ प्रबंधक मानव संसाधन ने कर्मचारियों को इस सामाजिक पहल से जोड़ने के लिए प्रेरित किया और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की। कार्यक्रम के दौरान आर०सी०उपाध्याय प्रबन्धक लाइजिनिंग ने भी विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि आईजीएल द्वारा आयोजित यह रक्तदान शिविर केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि समाज के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल जरूरतमंद मरीजों को सहायता मिलती है बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।

रक्तदान शिविर में उपस्थित अन्य सहयोगियों ने भी आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर डॉ सिद्धार्थ, देवेंद्र जोशी, नीरज पांडे, रोहित गोयल, अमित कुमार, सचिन गुप्ता, शरद शर्मा, दीपक भट्ट और क्लैरेंट आईजीएल से जुड़े आकाश अग्नि, गुलशन कुमार, दीपक शर्मा तथा सचिन चौहान सहित अनेक लोगों ने अपनी सहभागिता निभाई। इन सभी लोगों ने रक्तदान करने के साथ-साथ आयोजन की व्यवस्थाओं में भी सहयोग दिया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों ने कहा कि आईजीएल द्वारा आयोजित इस प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम न केवल संस्था की सकारात्मक छवि को मजबूत करते हैं बल्कि समाज में सेवा की प्रेरणा भी देते हैं। कई रक्तदाताओं ने यह भी कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता और यही सोच उन्हें इस शिविर में भाग लेने के लिए प्रेरित करती है।

समापन अवसर पर आईजीएल प्रबंधन की ओर से सभी रक्तदाताओं, चिकित्सकीय टीम तथा कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। आर०सी०उपाध्याय प्रबन्धक लाइजिनिंग आई0जी0एल0 काशीपुर ने कहा कि आईजीएल हमेशा से सामाजिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देता आया है और भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय एम. एल. भरतिया के आदर्श और विचार आज भी आईजीएल परिवार को समाज सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। उनके मार्गदर्शन और विचारधारा के कारण ही आईजीएल केवल एक औद्योगिक संस्था नहीं बल्कि समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने वाला संगठन बन पाया है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि मानवता की सेवा और जरूरतमंदों की सहायता के लिए ऐसे प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, ताकि समाज में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवीयता की भावना मजबूत हो सके।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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