काशीपुर। शैक्षणिक परिदृश्य में बुधवार का दिन उस समय विशेष बन गया जब इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के पीजी कॉन्फ्रेंस हॉल में एक प्रभावशाली एक्सपर्ट टॉक का आयोजन हुआ और परिसर ज्ञान, प्रेरणा तथा सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा। विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने कार्यक्रम को एक गरिमामय वातावरण प्रदान किया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर (HAG) एवं प्रख्यात वैल्यू एजुकेटर डॉ. नवनीत अरोड़ा ने अपने सशक्त विचारों से श्रोताओं को संबोधित किया। सभागार में उपस्थित युवा चेहरों पर जिज्ञासा और सीखने की उत्कंठा स्पष्ट दिखाई दे रही थी। आयोजन का उद्देश्य केवल एक औपचारिक व्याख्यान तक सीमित नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के गहरे आयामों से जोड़ना और उन्हें मूल्य आधारित सोच की ओर प्रेरित करना भी था। संस्थान के शैक्षणिक कैलेंडर में इस प्रकार के कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया जाता है, क्योंकि ये विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और नैतिक सुदृढ़ता को नई दिशा प्रदान करते हैं।
प्रेरक सत्र के दौरान डॉ. नवनीत अरोड़ा ने “Higher Feelings and Human Relations” विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए जीवन में उच्च भावनाओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की वास्तविक प्रगति केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके भीतर विकसित होने वाली सकारात्मक संवेदनाओं और मानवीय संबंधों की गहराई से तय होती है। अपने सहज और प्रभावशाली वक्तव्य में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में करुणा, सहयोग और उत्तरदायित्व का भाव विकसित कर ले, तो उसकी सफलता स्थायी और सार्थक बन जाती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि प्रतिस्पर्धा की दौड़ में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि व्यक्ति अपने भीतर संतुलन और संतोष बनाए रखे। सभागार में उपस्थित विद्यार्थियों ने उनके विचारों को गंभीरता से सुना और कई बार तालियों की गूंज से वक्ता का उत्साहवर्धन किया।
ज्ञानवर्धक चर्चा के बीच डॉ. नवनीत अरोड़ा ने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देना है। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि वे अपने करियर की योजना बनाते समय केवल आर्थिक उपलब्धियों पर ध्यान न दें, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्व को भी समझें। उनके अनुसार, वास्तविक उपलब्धि वही है जो व्यक्ति को आंतरिक शांति, स्थिरता और दूसरों के लिए उपयोगी बनने की प्रेरणा दे। उन्होंने अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश-विदेश में दिए गए सैकड़ों व्याख्यानों के दौरान उन्होंने पाया है कि जिन लोगों ने मूल्यों को प्राथमिकता दी, वही दीर्घकालिक सफलता हासिल कर सके। उनका सरल, संवेदनशील और आत्मीय व्यक्तित्व श्रोताओं के मन में गहरी छाप छोड़ गया और अनेक विद्यार्थियों ने कार्यक्रम के बाद उनसे व्यक्तिगत रूप से भी संवाद किया।

इस विशेष अवसर पर भोपाल से पधारे विशिष्ट अतिथि राजेश रमानी की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। उन्होंने अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली वक्तव्य में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे सत्र जीवन की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं। राजेश रमानी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे इन अवसरों को केवल औपचारिक कार्यक्रम न समझें, बल्कि इन्हें आत्ममंथन और आत्मविकास का माध्यम बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में मूल्यों को अपनाना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है और यदि विद्यार्थी अभी से सही सोच विकसित कर लें, तो भविष्य में वे समाज के लिए आदर्श उदाहरण बन सकते हैं। उनके शब्दों ने उपस्थित श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार किया और सभागार में एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण हुआ।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. नवनीत अरोड़ा की साहित्यिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। वे कई प्रेरणादायी पुस्तकों के लेखक हैं और Better Life Training Institute के संस्थापक के रूप में व्यापक पहचान रखते हैं। विभिन्न देशों और प्रतिष्ठित संस्थानों में उनके व्याख्यानों ने अनगिनत युवाओं को प्रेरित किया है। उनका प्रसिद्ध संदेश — “हम जो पाते हैं उससे जीवन चलता है, लेकिन हम जो देते हैं उससे जीवन बनता है” — पूरे सत्र का केंद्रीय सूत्र बन गया। इस संदेश ने विद्यार्थियों को यह सोचने पर विवश कर दिया कि जीवन में प्राप्तियों से अधिक महत्व देने की भावना का है। वक्तव्य के दौरान जब उन्होंने इस विचार को दोहराया, तो सभागार तालियों से गूंज उठा और कई विद्यार्थियों ने इसे अपने जीवन का मार्गदर्शक सिद्धांत मानने की बात कही।
समापन सत्र में संस्थान के अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने मुख्य वक्ता और अतिथियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम संस्थान की शैक्षणिक संस्कृति को सुदृढ़ करते हैं। निदेशक प्रो0 (डॉ0) योगराज सिंह ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक शिक्षा भी मिलनी चाहिए, तभी वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। प्राचार्य डॉ0 एस0 एस0 कुशवाहा ने भी डॉ. नवनीत अरोड़ा और राजेश रमानी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचार लंबे समय तक विद्यार्थियों के मन में प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने यह अनुभव किया कि यह केवल एक व्याख्यान नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों को समझने और आत्मचिंतन का अवसर था, जिसने परिसर के वातावरण को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की।





