spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडअलका पाल ने उठाया भोजन माताओं के अधिकारों का मुद्दा, सरकार पर...

अलका पाल ने उठाया भोजन माताओं के अधिकारों का मुद्दा, सरकार पर कड़ा आरोप लगाया

अलका पाल ने कहा कि भोजन माताओं का मानदेय महंगाई के अनुरूप नहीं, बच्चों के पोषण और परिवार के भरण-पोषण को प्रभावित कर रहा है, कांग्रेस उनकी आर्थिक सुरक्षा और न्याय दिलाने तक संघर्ष करेगी।

काशीपुर। भोजन माताओं के मुद्दे ने एक बार फिर सामाजिक और राजनीतिक बहस को उभार दिया है। महानगर कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष अलका पाल ने स्पष्ट किया कि भोजन माताओं को नियमित न करना सरकार का नारी विरोधी चेहरा प्रदर्शित करता है। उनका कहना था कि वर्षों से सीमित आय पर कार्य कर रही ये माताएं न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, बल्कि बच्चों को समय पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने जैसे संवेदनशील कार्य भी निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें ऐसा मानदेय दिया जा रहा है, जो उनकी रोजमर्रा की आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाता। अलका पाल ने जोर देकर कहा कि यह केवल आर्थिक असमानता का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।

अलका पाल ने बताया कि वर्तमान में भोजन माताओं को मिलने वाला मानदेय महंगाई की दर को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। खाद्य पदार्थ, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर लगातार बढ़ते खर्च को देखते हुए यह राशि उनके लिए कम पड़ रही है। परिणामस्वरूप कई माताओं को अपने घर का बजट चलाने के लिए उधार लेना पड़ता है, जिससे आर्थिक दबाव और तनाव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा घोषित मानदेय व्यवहार में लागू नहीं होने से आर्थिक अस्थिरता और बढ़ गई है। भुगतान की कोई निश्चित तिथि न होने के कारण कई बार महीनेभर मानदेय तक नहीं मिलता, जिससे परिवार की आवश्यकताओं जैसे बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है।

महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि शासन ने पांच हजार रूपए मासिक मानदेय घोषित किया है, तो वास्तविक में केवल तीन हजार रूपए क्यों दिए जा रहे हैं। उनका कहना था कि यह दो हजार रूपए कहां जा रहे हैं, यह जांच का विषय होना चाहिए। अलका पाल ने यह भी बताया कि शिक्षा व्यवस्था का यह महत्वपूर्ण हिस्सा होने के बावजूद भोजन माताओं को ना तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिया गया, ना ही उनके लिए स्थायी नीति बनाई गई। इससे न केवल उनकी आर्थिक सुरक्षा प्रभावित होती है, बल्कि उनका पेशेवर सम्मान भी खतरे में आता है।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय का असमान वितरण और लागू न होना महिलाओं के आत्म-सम्मान और पेशेवर पहचान के लिए गंभीर समस्या है। भोजन माताओं की मेहनत और जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें उचित और नियमित भुगतान मिलना चाहिए। अलका पाल ने कहा कि यदि शासन ने पांच हजार रूपए का मानदेय घोषित किया है, तो इसे पूरी तरह से लागू करना ही उचित होगा, अन्यथा यह धोखा और अन्याय के समान है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी माताओं के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी और उनके न्याय के लिए हर मंच पर आवाज उठाएगी।

शहर के विभिन्न हिस्सों में भोजन माताओं की समस्याओं को लेकर बहस तेज हो गई है। अलका पाल ने कहा कि भोजन माताओं की मेहनत का सही मूल्यांकन होना चाहिए, क्योंकि यह न केवल उनके परिवार की भलाई के लिए जरूरी है बल्कि बच्चों की शिक्षा और पोषण पर भी इसका प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन का रवैया महिलाओं के प्रति असंवेदनशीलता का प्रतीक है और इसे सुधारने की तत्काल आवश्यकता है। अलका पाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाएगी और माताओं के अधिकारों की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।

अलका पाल ने यह भी बताया कि वर्तमान मानदेय के स्तर से माताओं को उधार लेना पड़ता है और आर्थिक दबाव के चलते उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मानदेय सम्मानजनक स्तर पर तय किया जाए तो माताएं अपने परिवार का भरण-पोषण आत्म-सम्मान के साथ कर सकती हैं और बच्चों को समय पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में सक्षम होंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को संसद और सरकार के सामने उठाते रहेंगे और माताओं को न्याय दिलाने तक पीछे नहीं हटेगी।

विभिन्न स्कूलों में काम कर रही माताओं ने भी अपनी समस्याएं साझा की हैं। उनका कहना है कि कई बार महीनेभर मानदेय नहीं मिलता, जिससे उनके परिवार का बजट प्रभावित होता है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। माताओं ने बताया कि कई बार उन्हें कर्ज लेकर अपने परिवार का पालन-पोषण करना पड़ता है। अलका पाल ने कहा कि यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी इसका समाधान कराने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है।

अलका पाल ने बताया कि शासन की ओर से मानदेय को स्थायी रूप से लागू न करने से माताओं की स्थिति अस्थिर हो गई है। इससे न केवल उनका आर्थिक भविष्य अनिश्चित है, बल्कि पेशेवर पहचान और समाज में उनकी भूमिका भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार तत्काल कार्रवाई नहीं करती, तो यह महिलाओं के अधिकारों और उनके आत्म-सम्मान के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और माताओं को न्याय दिलाने तक पीछे नहीं हटेगी।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!