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अंडरग्राउंड चेंबर से हाईटेक नकल गिरोह का खुलासा रिमोट सिस्टम से हल होते प्रश्नपत्र उजागर

एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में लाखों रुपये लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने वाला संगठित नेटवर्क बेनकाब, सील हुआ परीक्षा केंद्र, अत्याधुनिक उपकरण बरामद, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी, अन्य सदस्यों की तलाश में तेज छापेमारी अभियान शुरू।

देहरादून। केंद्रीय प्रतियोगी परीक्षा के दौरान उत्तराखंड एसटीएफ ने एक बड़े हाईटेक नकल गिरोह का पर्दाफाश कर प्रदेशभर में सनसनी फैला दी है। बीती 13 फरवरी को संचालित इस परीक्षा में अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से पास कराने की साजिश रची जा रही थी, जिसे एसटीएफ ने समय रहते उजागर कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान परीक्षा में नकल कराने वाले दो आरोपियों नीतिश कुमार और भास्कर नैथानी को गिरफ्तार किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ आईजी नीलेश भरणे ने स्वयं मीडिया के सामने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। इस मामले में जिस परीक्षा केंद्र का उपयोग किया जा रहा था, उसे तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का लालच देकर उनसे लगभग 10 लाख रुपए तक की मोटी रकम मांगता था। इस खुलासे के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

देशभर में आयोजित इस भर्ती परीक्षा को भारत सरकार द्वारा कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से आयोजित कराया गया था, जिसमें मल्टी टॉस्किंग (Non-Technical) Staff और हवलदार Central Board of Indirect Taxes and Customs तथा Central Bureau of Narcotics के पदों के लिए अभ्यर्थियों की परीक्षा ली जा रही थी। परीक्षा का आयोजन अलग-अलग राज्यों के परीक्षा केंद्रों पर एक साथ किया गया था, जिसमें उत्तराखंड भी शामिल था। इसी परीक्षा के दौरान आधुनिक तकनीक के जरिए नकल कराने का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह तकनीकी उपकरणों के जरिए प्रश्न पत्र हल कर अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की योजना पर काम कर रहा था। इस तरह की संगठित साजिश ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करने का प्रयास किया, जिसे एसटीएफ ने सटीक कार्रवाई कर विफल कर दिया। अधिकारियों के अनुसार इस प्रकार की हाईटेक धोखाधड़ी लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी।

नकल गिरोह के भंडाफोड़ के दौरान एसटीएफ टीम ने दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया, जिन्होंने परीक्षा में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलने की योजना बनाई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार गिरोह का नेटवर्क काफी संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम था, जो अभ्यर्थियों को भ्रमित कर उन्हें अवैध तरीके से सफलता दिलाने का झांसा देता था। एसटीएफ द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान परीक्षा केंद्र से कई महत्वपूर्ण उपकरण बरामद किए गए, जिनका उपयोग नकल कराने में किया जा रहा था। इन उपकरणों को जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं और इस दिशा में गहन जांच जारी है। अभ्यर्थियों को फंसाने के लिए गिरोह पहले उनसे संपर्क करता था और उन्हें सफलता का भरोसा दिलाकर आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश करता था।

पुलिस और एसटीएफ पहले से ही इस तरह की अवैध गतिविधियों को लेकर सतर्क थी और उन्हें आशंका थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान असामाजिक तत्व सक्रिय हो सकते हैं। भारत सरकार द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा के दौरान उत्तराखंड के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी थी। अधिकारियों को लगातार यह सूचना मिल रही थी कि कुछ गिरोह अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का लालच देकर अपने जाल में फंसा सकते हैं। इसी आशंका के आधार पर एसटीएफ ने अपनी खुफिया निगरानी को और मजबूत किया। परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी, जिससे समय रहते इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश संभव हो सका।

गिरोह के खिलाफ कार्रवाई तब तेज हुई जब एसटीएफ को यूपी और उत्तराखंड दोनों राज्यों से इनपुट मिला कि कुछ लोग संगठित गिरोह बनाकर अभ्यर्थियों को धोखा देने की योजना बना रहे हैं। इस सूचना के आधार पर दोनों राज्यों की एसटीएफ टीमों ने संयुक्त रणनीति तैयार की और संदिग्ध स्थानों पर निगरानी शुरू की। जांच के दौरान यह पता चला कि देहरादून स्थित परीक्षा केंद्र महादेव डिजिटल जोन, एमकेपी इंटर कॉलेज में संदिग्ध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके बाद टीम ने गुप्त रूप से जांच करते हुए अचानक दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान परीक्षा केंद्र में मौजूद कर्मचारियों और उपकरणों की गहन जांच की गई। एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई बेहद सावधानी और तकनीकी निगरानी के साथ की गई, ताकि गिरोह के सदस्यों को पकड़ने में सफलता मिल सके और किसी भी सबूत को नष्ट होने से बचाया जा सके।

दबिश के दौरान एसटीएफ टीम को परीक्षा लैब के पास स्थित यूपीएस रूम में एक संदिग्ध स्थान दिखाई दिया, जहां जांच करने पर 24×24 इंच का अंडरग्राउंड चेंबर पाया गया। इस गुप्त स्थान के भीतर दो लैपटॉप और एक राउटर ऑटोमेटिक मोड में संचालित अवस्था में मिले। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इन उपकरणों को दूरस्थ स्थान से रिमोट तरीके से संचालित किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक का उपयोग कर परीक्षा के प्रश्न पत्रों को हल किया जा रहा था और संबंधित अभ्यर्थियों को जवाब उपलब्ध कराए जा रहे थे। इस खुलासे के बाद टीम ने तत्काल उपकरणों को कब्जे में लेकर उन्हें सील कर दिया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे तथा किस स्तर तक यह गिरोह सक्रिय था।

एसटीएफ की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी डिजिटल उपकरणों की जांच की और उन्हें सुरक्षित तरीके से जब्त किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अत्याधुनिक तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर कंप्यूटर सिस्टम को रिमोट एक्सेस के जरिए नियंत्रित करता था। इस प्रक्रिया के माध्यम से प्रश्न पत्रों को हल कर अभ्यर्थियों तक पहुंचाया जाता था। आरोपियों की पहचान नीतिश कुमार निवासी नागलोई दिल्ली और भास्कर नैथानी निवासी देहरादून के रूप में हुई, जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उनसे गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और इसमें कई तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हो सकते हैं।

पूछताछ के दौरान एसटीएफ आईजी नीलेश भरणे ने बताया कि आरोपी अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का भरोसा दिलाकर उनसे लगभग 10 लाख रुपए की मांग करते थे। रकम मिलने के बाद गिरोह अत्याधुनिक तकनीक के जरिए परीक्षा के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच बनाता था और प्रश्न पत्रों को हल कर देता था। इस तरह की धोखाधड़ी न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है बल्कि मेहनत से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के साथ भी अन्याय करती है। अधिकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस प्रकार की गतिविधियां राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन चुकी हैं और इन्हें रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। एसटीएफ ने इस मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच शुरू कर दी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश तेज कर दी गई है।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह अभ्यर्थियों को झांसे में लेने के लिए पहले उनसे संपर्क करता था और उन्हें परीक्षा में सफलता की गारंटी देने का दावा करता था। इसके बाद उनसे मोटी रकम वसूल कर अवैध तकनीकों के जरिए परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जाता था। अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे इस प्रकार के झूठे दावों और लालच से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या एसटीएफ को दें। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए अभ्यर्थियों का सहयोग भी बेहद जरूरी है। इस मामले के सामने आने के बाद परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

पूरे घटनाक्रम ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन एसटीएफ की त्वरित कार्रवाई ने यह भी साबित किया है कि प्रशासन ऐसे अपराधों को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीम गठित की गई है और विभिन्न राज्यों में छापेमारी की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्थिति में अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद अभ्यर्थियों में भी विश्वास बढ़ा है कि मेहनत और योग्यता के आधार पर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है और परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सख्त कदम लगातार उठाए जाएंगे।

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